हक से गुनाह का सिलसिला जारि
वो रखते हैं गैरो पे करम करके
खुद को अपना होनेका दावा करते है
---रेखा शुक्ला
सितम अब ना सेह पायेंगे
रब से जुदा हुम अपने को करते है
तमन्ना हो आपकी सदा पूरी
यहीं शशी से आशिष मांगते है
---रेखा शुक्ला
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