बुंद बुंद प्यार बढा
आके खुदा फिर भी रूठा
जब उंगलि पकडी पापा ने
प्यार की पहेचान हुई
मा ने सिखाया गाना
तो प्यास प्यार की और बढी
हा शब्द जाल मे फंसी
जिधर देखा उस्को पाया
ये पेहला पेहला प्यार बढा
कलाकार- संगीतकार-चित्रकार
का वैसे भी पेह्ली नजर मे
उभर गया प्यार !!
----रेखा शुक्ला
आके खुदा फिर भी रूठा
जब उंगलि पकडी पापा ने
प्यार की पहेचान हुई
मा ने सिखाया गाना
तो प्यास प्यार की और बढी
हा शब्द जाल मे फंसी
जिधर देखा उस्को पाया
ये पेहला पेहला प्यार बढा
कलाकार- संगीतकार-चित्रकार
का वैसे भी पेह्ली नजर मे
उभर गया प्यार !!
----रेखा शुक्ला
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