સોમવાર, 6 ઑક્ટોબર, 2014

प्यार की पहेचान हुई

बुंद बुंद प्यार बढा
आके खुदा फिर भी रूठा

जब उंगलि पकडी पापा ने
प्यार की पहेचान हुई

मा ने सिखाया गाना
तो प्यास प्यार की और बढी

हा शब्द जाल मे फंसी
जिधर देखा उस्को पाया

ये पेहला पेहला प्यार बढा
कलाकार- संगीतकार-चित्रकार 

का वैसे भी पेह्ली नजर मे 
उभर गया प्यार !!
----रेखा शुक्ला

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