वक्त वक्त की चाह मे जब वक्त वक्त की आह है
वक्त दिखाये राह मे परिंदे तुज मे कित्नी आग है
---रेखा शुक्ला
मैं जिन्दा लाश यहां मुर्दे की तरहा सोया करुं
जब जागु तो बेजान एक ही वजहा रोया करुं
---रेखा शुक्ला
गुंजे कानमे आवाझ और धडकन लगे फट जायेगी
ऐसे राझमे जान और घडकन लगे रूक जायेगी !
----रेखा शुक्ला
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