चलो कहीं और चले गुफ्तगु थोडी तो करले
खूबसूरत शाम मे मिले सितारोसे बाते करले
गुलशन के कोने की कलीयां के इशारे चले
समंदर की लहरे जोडे नाता रेत से होले होले
आबाद हो जाये सूरज की किरनों के हो चले
कैसे कहु तुमसे जूडी जान, ना संभलके चले
परिंदा का बचपना जले, शामिल करके चले
गुस्ताखी माफ, खूबसूरत लम्हें उदास चले
खिले हुये फूल मे छूपा एक उदास फूल बोले
वक्त ने जेहमत उठानी प्यार की कहानी बोले
चूपके से चली आई परी ओ की रानी अब बोले
खयाले जुस्तजू, ख्वाहिशे इम्तहां खामोश चले
मुंहपे होके मौन का ताल, पांव तले कूचल चले
प्यारी वो शिकायतें, शेतानी परेशानीयां बोले
------रेखा शुक्ला
अपनी तन्हांईयां, वो लडाईयां, शोर मचाये खामोशियां
जेहमत ना उठाईये, कहां फस गई आके जिम्मेदारियां
----रेखा शुक्ला
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